नर्मदापुरम: नशा मुक्त भारत सशक्त विषय पर गृहविज्ञान कॉलेज में हुआ संगोष्ठी का आयोजन

नर्मदापुरम। शासकीय गृहविज्ञान स्नातकोत्तर अग्रणी महाविद्यालय नर्मदापुरम में सोमवार को नशा मुक्त भारत सशक्त भारत विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि जनभागीदारी अध्यक्ष संध्या थापक, महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. कामिनी जैन, विषय विशेषज्ञ संकल्प जिला नशामुक्ति शहर पुनर्वास  राहुल सिंह, डॉ. जेपीएन चतुर्वेदी, निहारिका अमितेश मालवीय लक्ष्य मुक्ति केंद्र इटारसी, योगाचार्य राकेश चौहान, कार्यक्रम संयोजक डॉ. कंचन ठाकुर, सचिव डॉ. हर्षा चचाने ने मंच पर अपनी गरिमामई में उपस्थिति प्रदान की।

मां सरस्वती की पूजन एवं दीप प्रज्ज्वलन के पश्चात कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। महाविद्यालय स्टाफ के द्वारा अतिथियों का स्वागत सत्कार किया गया। इस अवसर पर संगीत विभाग के विभागाध्यक्ष प्रेमकांत कटंगकार एवं संगीत विभाग की छात्रा कुमारी पूजा गोस्वामी और सौम्या चौहान ने सरस्वती वंदना एवं स्वागत गीत की प्रस्तुति दी। अतिथियों द्वारा नशा मुक्त भारत सशक्त भारत विषय पर संक्षेपिका का विमोचन किया गया।

इस अवसर पर महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. कामिनी जैन ने अपने स्वागत भाषण में हम माननीय कलेक्टर नीरज कुमार सिंह के लिए धन्यवाद ज्ञापित करते हैं जिन्होंने इस प्रकार की संगोष्ठी के लिए महाविद्यालय को वित्तपोषित किया। 

डॉ. जैन ने कहा कि हमारी छात्राओं की टीम ने गोद ग्राम एवं स्लम एरिया में सर्वे कर पता लगाया कि वर्तमान में युवा कौन-कौन से नशे के आदी हैं। दुर्घटना का 90 प्रतिशत कारण नशा ही होता है। घातक बीमारी का कारण अधिकांशतः नशा ही माना गया है। नशा नाश का कारण होता है वह हमें आदतन अपराधी एवं अपराध करने हेतु प्रेरित करता है। 

नशे के प्रभाव में व्यक्ति की सोचने समझने की क्षमता कम हो जाती है एवं नशे के कारण वह असामाजिक कार्य कर देता है। जिससे समाज में तनाव उत्पन्न होता है। मादक पदार्थों का सेवन आजकल के युवाओं के लिए प्रचलन और फैशन बन चुका है। आप आज की नारी हैं और परिवार की महत्वपूर्ण धुरी है आप नशा मुक्त भारत की सर्वप्रथम शुरुआत घर से ही करें। 

इस अवसर पर डॉ. हर्षा चचाने विषय प्रवर्तन करते हुए कहा कि सर्वप्रथम नशे के कारण को जाने एवं जड़ से मिटाने का प्रयास करें। हमें अपने गौरवशाली इतिहास को समझना होगा और यह जानना होगा कि हम सबसे अदम्य है। आपका एक प्रयास किसी के जीवन को प्रकाश से भर सकता है। इस अवसर पर विषय विशेषज्ञ राहुल सिंह ने कहा कि जिस पदार्थ के सेवन करने से बुद्धि भ्रष्ट हो जाए एवं स्वयं पर नियंत्रण न बचे वह नशा है। 

नशा भयावह और खत्म न होने वाली बीमारी है। शुरुआती तौर पर नशा आकर्षण होता है परंतु बाद में विकट रूप धारण कर लेता है। मुख्य वक्ता डॉ. जेपीएन चतुर्वेदी ने अपने उद्बोधन में तंबाकू एवं गुटका का दुष्प्रभाव बताए। कैंसर की कुल संख्या का 50 प्रतिशत मुंह का कैंसर होता है। 

नर्मदापुरम जिला स्तर पर तंबाकू नियंत्रक समिति से अवगत कराया और विभिन्न धाराओं की जानकारी छात्राओं से साझा की। निहारिका अमितेश मालवीय ने छात्राओं से प्रश्न पूछ कर उन्हें मार्गदर्शित करते हुए कहा कि जो चीज किसी की परेशानी का कारण बने वह नशा है हमें परिवार में सकारात्मक वातावरण रखना होगा जब हमारा मन मस्तिष्क एक होगा तो हम नशे से दूर होंगे। सकारात्मक हर नशे से मुक्त कर सकती है।

योगाचार्य राकेश चौहान ने कहा कि जब हम लोगों का लोगों को समूह में नशा करते देखते हैं तो हमें लगता है यह सही है। मादक पदार्थों के उपयोग से हम अधोगति को प्राप्त होते हैं योग सकारात्मकता प्रदान करता है। हम इंद्रियों को नियंत्रित नियंत्रण में कर पाए तो नशा से लड़ सकते है। संगोष्ठी संयोजक डॉ. कंचन ठाकुर ने विभिन्न आंकड़ों के माध्यम से देश में नशा का उपयोग करने वाले युवाओं का आंकड़ा बताया एवं उसके दुष्परिणाम से अवगत कराया।

इस अवसर पर कुमारी नोसिबा खान और कुमारी शीतल पांडे ने लघु फिल्म के माध्यम से अपना प्रेजेंटेशन दिया। रघुवीर सिंह राजपूत ने वैदिक पद्धति से आत्मविश्वास बढ़ाकर नशा मुक्ति हेतु प्रेरित किया। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. नीतू पवार ने एवं आभार श्री रफीक अली ने किया इस अवसर पर डॉ. अनिल रजक डॉ. कीर्ति दीक्षित ने विशेष सहयोग प्रदान किया।

इस संगोष्ठी में डॉ. पुष्पा दुबे डॉ. किरण पगारे, डॉ. वर्षा चौधरी डॉ. भारती दुबे डॉ. संध्या राय डॉ. संगीता अहिरवार, डॉ आर बी. शाह, डॉ. वैशाली लाल डॉ. मनीषा तिवारी डॉ. विजया देवास्कर, डॉ दशरथ मीणा, अजय तिवारी,  शीतल मेहरा  किरण विश्वकर्मा डॉ. प्रगति जोशी  धीरज खातरकर, डॉ. घनश्याम डेहरिया, डॉ मधु विजय डॉ. हेमंत चौधरी डॉ. रीना मालवीय, महाविद्यालय स्टाफ एवं भारी संख्या में छात्राएं उपस्थित रहीं।

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