झारखंड के 80 सरकारी स्कूल बदले ‘एक्सीलेंस स्कूल’ में जानिए इससे किन बच्चों को मिलेगा फायदा

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Jharkhand School Of Excellence :सरकार द्वारा गरीब बच्चों को प्राइवेट स्कूल की तर्ज पर शिक्षा देने के लिएइस सत्र के 80 स्कूल आफ एक्सीलेंस शुरू किए गए हैं। जहां पर ऑटो रिक्शा चालकऔर गरीब मजदूरों के बच्चों को प्राइवेट स्कूलों की शिक्षा के आधार पर ही शिक्षा देकर उनका सपना सरकार किया जाएगा।

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सरकार द्वारा की गई नई पहल 

वर्तमान में महंगाई इतनी बढ़ गई है। गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों के बच्चों को प्राइवेट स्कूल में पढ़ाना  सपना जैसा बनकर ही रह गया है। ऐसे परिवा रचाह कर भी अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूल में नहीं पढ़ा पा रहे हैं। ऐसे मैं झारखंड सरकार द्वारा एक नई पहल की गई है।

झारखंड के 80 सरकारी  स्कूलों को स्कूल ऑफ़ एक्सीलेंस में बदल दिया गया है। इन स्कूलों का उद्देश्य यह है कि यहां पर पढ़ने वाले सभी विद्यार्थियों को कक्षा छठवीं से लेकर 12वीं तक के सभी बच्चे जो की बीपीएल कार्ड धारक परिवार से आते हैं। उन्हें प्राइवेट स्कूलों की तरह ही स्मार्ट क्लास की तर्ज पर पढ़ाया जाएगा।

जिससे कि आदिवासी और गरीब परिवारों के बच्चों को क्रिएटिव और पर्सनालिटी में सुधार लाया जा सके जिससे कि वह कक्षा 12वीं के बाद आने वाली भविष्य की चुनौतियां को समझने में दिक्कतों का सामना न करना पड़े। 

दिल्ली की तर्ज पर दी जाएगी शिक्षा 

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जी नेदिल्ली के बच्चों के लिए पढ़ना लिखना बहुत आसान बना दिया है। और हर गरीब वर्ग का बच्चा उस बेहतर शिक्षा का हकदार होता है। जिसे हर मां-बाप अपने बच्चों को देना चाहते हैं। 

अब झारखंड सरकार को भी इस बात का एहसास हो गया है कि दिल्ली के स्कूलों की तरह ही झारखंड के सरकारी स्कूलों को भीनई-नई तकनीक और संसाधनों के साथ जोड़कर बच्चों को ऐसी शिक्षा दी जा सके जहां से निकलकर वह अपने भविष्य को आसानी  से उज्जवल बना सके।

जिन परिवारों की माता-पिता मजदूरी करते हैं। उनकी बच्ची ही केवल सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे हैं। आज के समय में भारत की स्कूलों की स्थिति बहुत दयानीय है। भले ही वह कोई राज्य क्यों ना हो जिसके पास पैसा है। वह अपने बच्चों को अच्छे प्राइवेट स्कूल में पढ़ रहा है। 

परंतु जिसके पास पैसा नहीं है। और जो गरीब परिवारसे आता है। उसके बच्चे ही केवल सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे हैं। क्योंकि वह प्राइवेट स्कूल का खर्चा उठाने में सक्षम नहीं है। इस कारण उनके बच्चे अच्छी शिक्षा को प्राप्त करने से वंचित रह जाते हैं। 

झारखंड के नई स्कूलों की स्थिति

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इस सत्र से जब झारखंड में स्कूल आफ एक्सीलेंस खोले गए और इनमें जो बच्चे पढ़ रहे हैं। वह बहुत खुश है। और स्कूल आफ एक्सीलेंस की एक मैडम ज्योति मंडल रहती है कि इन स्कूलों में 6 महीने के अंदर ही इतना परिवर्तन हो गया है। 

उन्हें भी बढ़ाने में बहुत अच्छा लग रहा है। उनकी क्रिएटिविटी के साथ-साथ बच्चों में भी इसका उत्साह दिखाई दे रहा है। यहां के बच्चे अब चंद्रयान-3 पर लिख रहे हैं। तो कोईअपना कार्डआर्ट बना रहा हैजब से सरकारी स्कूलों को स्कूल आफ एक्सीलेंस में बदल गया है। झारखंड के बच्चों की दशा ही बदल गई है।

इन स्कूलों को शुरू करने का उद्देश्य 

जब झारखंड के सचिव रवि कुमार से बात की गई तो उन्होंने बताया कि स्कूल आफ एक्सीलेंस खोलने के पीछे सरकार का मुख्य उद्देश्य यही है। कि इन स्कूलों की पढ़ाई सी बी एस ई शिक्षा के आधार पर ही की जाए और गांव में भी जितने स्कूल खोले गए हैं। 

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उन्हें स्कूलों की परीक्षाएं स्टेट बोर्ड के आधार पर ही की जाएगी परंतु बच्चों के उज्जवल भविष्य को देखते हुए सरकार को यह है। कदम उठाना पड़ा और हमें बहुत खुशी है। कि सरकार के इस कदम से गरीब बच्चों के भविष्य को भी उज्जवल बनाया जा सकता है।

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