नर्मदापुरम: व्यक्तित्व विकास में राष्ट्रीय सेवा योजना की भूमिका विषय पर होम साइंस कॉलेज में आयोजित हुई संगोष्ठी

नर्मदापुरम। शासकीय गृहविज्ञान स्नातकोत्तर अग्रणी महाविद्यालय नर्मदापुरम में शुक्रवार को ’’व्यक्तित्व विकास में राष्ट्रीय सेवा योजना की भूमिका’’ विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का ऑनलाइन ऑफलाइन आयोजन किया गया। संगोष्ठी के शुभारंभ में मां सरस्वती की पूजन एवं दीप प्रज्वलन के पास साथ ऑनलाइन कार्यक्रम के रूप में प्रथम सत्र का शुभारंभ किया गया। 

इस अवसर पर महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. कामिनी जैन ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि व्यक्तित्व का आकलन आंतरिक एवं वाह्य गुणों के आधार पर किया जाता है। व्यक्तित्व विकास में राष्ट्रीय सेवा योजना की भूमिका विषय पर आयोजित इस संगोष्ठी का विषय अत्यंत समयानुकूल है। मजबूत व्यक्तित्व हमारे अपनी अर्जित पूंजी होती है। व्यक्तित्व को मजबूत बनाने हेतु सतत प्रयास करना होता है हमें हमेशा सीखते रहना चाहिए। मनवोचित सबसे महत्वपूर्ण गुण है सीखना। एनएसएस हमारे अंदर चहुमुखी व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास करता है हम अपने राष्ट्र का गौरव बढ़ा सकते हैं।अपने व्यक्तित्व के साथ-साथ बेहतर समाज का निर्माण भी कर सकते हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में व्यक्तित्व विकास एवं एनएसएस को विषय के रूप में चयन करने का कारण भी यही है। 

कार्यक्रम संयोजक डॉ. रश्मि श्रीवास्तव ने विषय प्रवर्तन करते हुए कहा कि हमारा व्यक्तित्व हमारे संपूर्ण व्यवहार,प्रतिमान और उसकी विशेषताओं के योग को दर्शाता है। एनएसएस का एकमात्र उद्देश्य युवाओं को सामुदायिक सेवा के माध्यम से अपने व्यक्तित्व को विकसित करने के लिए अनुभव प्रदान करना है। 

मुख्य वक्ता डॉ. संजय कुमार प्राध्यापक मनोविज्ञान, इलाहाबाद, यूपी ने अपने उद्बोधन में कहा कि एनएसएस इकाई एक मजबूत युवा तैयार करके महत्वपूर्ण सामाजिक जिम्मेदारी का परिवहन करता है। व्यक्तित्व विकास का महत्वपूर्ण गुण है, कि आप अपने अधिकार को समझें एवं दूसरे के अधिकार का सम्मान करें। 

डॉ. रीता कुमारी ने अपने उद्बोधन में कहा कि जब आप एनएसएस के मूल्य वाक्य को समझते हैं तभी आपका सही विकास होता है व्यक्तित्व का सही विकास सेवा के माध्यम से होता है। मनुष्य एक जटिल प्राणी है खतरों का सामना करना, नियमित रहना, धीरज धारण करना, भरोसेमंद बनना, अनुशासित बने एवं संतुलित व्यवहार करके हम अपने व्यक्तित्व का विकास कर सकते हैं। उद्घाटन सत्र का सफल संचालन डॉ. निशा रिछारिया ने एवं आभार रफीक अली ने किया। 

द्वितीय सत्र का शुभारंभ पौधे की पूजा कर किया गया। डॉ. अनंत सक्सेना कार्यक्रम समन्वयक एनएसएस बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय भोपाल, महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ.कामिनी जैन, राहुल सिंह परिहार आईटीआई प्रशिक्षक मुक्त इकाई कार्यक्रम अधिकारी राष्ट्रीय सेवा योजना भोपाल, दिग्विजय सिंह खत्री, जिला संगठक रासेयो, कार्यक्रम संयोजक डॉ. रश्मि श्रीवास्तव, एनएसएस अधिकारी डॉ. हर्षा चचाने ने मंच पर अपनी गरिमामई उपस्थिति प्रदान की। 

इस अवसर पर मंचासीन अतिथियों के आदर सत्कार के पश्चात् व्यक्तित्व विकास में राष्ट्रीय सेवा योजना विषय पर पुस्तिका का विमोचन किया गया। संगोष्ठी सचिव डॉ.हर्षा  चचाने ने द्वितीय सत्र में विषय प्रवर्तन करते हुए बताया कि सफल व्यक्तित्व में सिर्फ ज्ञान ही नहीं अपितु आपके व्यक्तित्व की क्षमता का भी आकलन किया जाता है। हमेशा आपके चेहरे की प्रसन्नता एवं नया सीखने का प्रयास ही आपको शीर्ष पर पहुंचाता है। इस अवसर पर संगीत विभाग के विभागाध्यक्ष प्रेमकांत का कटंगकार एवं छात्राओं के द्वारा स्वागत गीत एवं राष्ट्रीय सेवा योजना लक्ष्य गीत का गायन किया गया। मुख्य वक्ता राहुल परिहार ने अपने उद्बोधन में बताया कि छोटी-छोटी बातें सीखते हुए अपने युग को अपने गुण को विकसित किया जा सकता है। व्यक्तित्व का काम है अपने आप की अलग पहचान बनाना। एनएसएस आपको बड़ा करके विद्यार्थी से संस्था की संपत्ति बनाने की परिकल्पना करता है। एनएसएस आपके अंदर बहुत सारे गुणों को पुरोधा के रूप में विकसित करता है। जब आप कॉलेज से कहीं अन्यत्र जाएं तो आप एक मिसाल के रूप में याद किए जाएं, आपके अंदर जो गुण है,  एनएसएस उसे बढ़ाने का कार्य करता है। डॉ. दिग्विजय खत्री ने एनएसएस के माध्यम से व्यक्तित्व विकास विषय पर चर्चा करते हुए बताया कि हमारे युवा वर्ग को रासेयो से परिचित कराते हुए एनएसएस के महत्व को समझाया। विशिष्ट वक्ता डॉ. अनंत कुमार सक्सेना ने बताया कि समाज सेवा के माध्यम से विद्यार्थियों के व्यक्तित्व का विकास किया जाना एक महत्वपूर्ण कार्य है। नेतृत्व का गुण रासेयो आप में विकसित करती है। राष्ट्रीय सेवा योजना आम से खास व्यक्ति बनाने की योजना है। गोद ग्राम, वस्ती, संस्थान में आपको अपने व्यक्तित्व को विकसित करने का प्लेटफार्म उपलब्ध कराया जाता है। कार्यक्रम के समापन में अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट किए गए। द्वितीय सत्र का सफल संचालन कुमारी सौम्या चौहान ने एवं आभार डॉ. रीना मालवीय ने किया। इस अवसर डॉ. कीर्ति दीक्षित, डॉ. घनश्याम डेहरिया, प्रीति ठाकुर, डॉ. अनिल रजक, रफीक अली, महाविद्यालयीन स्टॉफ, एनएसएस की स्वयंसेविकाएं एवं भारी संख्या में छात्राएं उपस्थित रहीं।

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