Chandrayaan 3: चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचने के लिए अंतरिक्ष एजेंसियों के बीच हो रही है बड़ी मुकाबला, जानिए इस रेस की रहस्यमयी वजह!

Moon’s South Pole: भारत के अनुसंधान केंद्र इसरो द्वारा chandrayaan-3 मिशन को चंद्रमा की सतह पर भेजा गया है और चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग की पूरी उम्मीद है यह खबर भारत के लिए इतिहास रखने जैसी होगी क्योंकि अभी तक पूरी दुनिया में कोई भी देश चांद के दक्षिणी हिस्से पर अपने मिशन को सफल एंडिंग नहीं करवा पाया है.

Moon Mission: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन इसरो द्वारा भेजा गया चंद्रयान मिशन 3 23 अगस्त बुधवार की शाम को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लैंड करने वाला है भारत के लिए यह एक बहुत बड़ी गर्व की बात होगी.

क्योंकि यदि ऐसा हुआ तो अंतरिक्ष की  सूची में भारत का नाम जुड़ जाएगा क्योंकि पूरी दुनिया का कोई भी देश अभी तक चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर चैट प्लानिंग नहीं कर पाया है ऐसे में यदि भारत कामयाब हो जाता है तो हर भारतीय के लिए गर्व की बात होगी.

यदि यह मिशन कामयाब हो जाता है तो इसकी कामयाबी से हमें पानी बर्फ और चंद्रमा के बारे में सभी जानकारियां आसानी से मिल जाएगी जो चंद्रमा के सबसे मूल्यवान संसाधनों की  जानकारियों के बारे में जानना हमें जरूरी था.

दुनिया में ऐसी कई एजेंसियां और प्राइवेट कंपनियां हैं जो इसे चंद्रमा कॉलोनी मंगल ग्रह और चंद्र खनन पर संभावितमिशनों  की कुंजी के रूप में देख रहे हैं.

चंद्रमा पर पानी की संभावना है 

अपोलो लैंडिंग से  पहले  वैज्ञानिकों ने 1960 के दशक की शुरुआत में ही इस बात का अनुमान लगा लिया था कि चंद्रमा पर पानी उपलब्ध हो सकता है परंतु 1970 के दशक की शुरुआत में अपोलो क्रू के द्वारा निरीक्षण के लिए जो नमूने भेजे गए थे.

वह चंद्रमा की  सतह  सूखे से आए तो ऐसा प्रतीत हुआ कि चंद्रमा की सतह पर पानी नहीं है. ब्राउन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने 2008 में नई टेक्नोलॉजी के अनुसार उन चंद्र नमूनों को फिर से विश्लेषण किया और ज्वालामुखी है.

कांच की छोटे मोतियों के अंदर हाइड्रोजन पाया और इसके बाद भारत ने फिर एक कोशिश 2009 में कि जो कि इसरो के चंद्रयान मिशन बन के नाम से जाना गया.और इसके द्वारा चंद्रमा की सतह पर पानी का पता लगाया गया.

2009 में फिर नासा ने एक अन्य दल से जांच की और से पता चला कि चंद्रमा की सतह के नीचे पानी की बर्फ जमी हुई है क्योंकि नासा ने जो सबसे पहला मिशन 1998 में लूनर को भेजकर इस बात का पता लगाया था कि चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पानी में बर्फ की सबसे अधिक सांद्रता पाई गई है और यह  दक्षिणी ध्रुव पर छायादार गड्ढों में थी.

चंद्रमा पर पानी इतना महत्वपूर्ण क्यों है

वैज्ञानिक कई दिनों से चंद्रमा की सतह पर जल वर्क में अपनी दिलचस्पी दिखाते हैं क्योंकि इसके द्वारा ज्वालामुखी धूमकेतु और सदस्यों द्वारा पृथ्वी पर पहुंचाई जाने वाली सामग्री और महासागरों की उत्पत्ति के रिकॉर्ड को आसानी से पता लगाया जा सकता है.

यदि चंद्रमा पर पानी की और वर्ष की पर्याप्त मात्रा मिल जाए तो चंद्रमा की खोज के लिए पीने के पानी का भी आसानी से पता लगाया जा सकता है जोकि उपकरणों को ठंडा करने में भी मदद कर सकता है.

यदि हम चाहे तो वहां पर पानी को ईंधन के लिए हाइड्रोजन और सांस लेने के लिए आप सीजन के रूप में भी तोड़ सकते हैं और मंगल ग्रह चंद्र खनन के मिशनौ को भी आसानी से मदद मिल सकती है.

क्या देश का चांद पर स्वयं का हक होगा

चांद पर किसी भी देश का स्वामित्व का दावा होना सही नहीं है क्योंकि 1967 में संयुक्त राष्ट्र वहां अंतरिक्ष संधि इस बात के लिए रोकती है इस संधि के अनुसार किसी भी वाणिज्यिक परिचालन को आसानी से रोका जा सकता है.

क्योंकि ऐसे किसी भी प्रावधान में नहीं है अमेरिका ने पहले ही चंद्रमा की खोज और उसके संसाधनों के उपयोग के लिए सिद्धांतों का एक सेट स्थापित करने के लिए आर्टेमिस समझौते पर 27 हस्ताक्षर करता है जिनमें चीन और रूस ने हस्ताक्षर नहीं किए हैं इसलिए चंद्रमा पर किसी भी देश का स्वामित्व नहीं स्थापित किया था.

दक्षिणी ध्रुव इतना महत्वपूर्ण क्यों है

चंद्रमा की सतह पर उतरी ध्रुव की अपेक्षा दक्षिणी ध्रुव चांद की बाकी हिस्सों की तुलना में काफी अलग और अंशुल जाता है यहां पर दुनिया में जितने भी देश ने अपने मिशन को भेजा है वह असफल ही रहा है और कुछ दिनों पहले ही रूस ने अपना लूना 25 इसी सप्ताह दक्षिणी ध्रुव पर भेजा था.

परंतु रविवार को पहुंचते पहुंचते ही वह अपनी नियंत्रण कक्ष से बाहर हो गया जिसके कारण वह दुर्घटनाग्रस्त हो गया  क्योंकि दक्षिणी ध्रुव गड्ढा और गहरी खाई हो से भरा हुआ है.

अब देखना यह है कि भारत द्वारा जो चंद्रयान मिशन 3 भेजा गया है वह दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग करके इतिहास रच पाता है या नहीं और संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन दोनों ने दक्षिणी ध्रुव पर मिशन भेजने के लिए योजना तैयार कर ली है.

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