Lord Krishna: भगवान कृष्ण ने क्यों छोड़ी थी अपनी बांसुरी? AI तस्वीरों के साथ जानिए उसकी अनसुनी कहानी।

Lord Krishna Flute: सभी लोग जानते हैं कि भगवान श्रीकृष्ण को उनकी बांसुरी बहुत प्रिय है और कई लोगों ने बंसी वाले के नाम से भी पुकारते हैं वह हमेशा अपने साथ बंसी रखते थे और उनकी बंसी की धुन सुनकर पूरा जगत भक्ति में खो जाता था परंतु क्या आप जानते हैं कि भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी बांसुरी क्यों तोड़ दी थी आइए आज इस लेख में इसकी वजह जानते हैं.

भगवान श्री कृष्ण  को बंसी बजाना बहुत अच्छा लगता था और वह अपनी खुशी को बंसी बजाकर व्यक्त करते थे यदि उन्हें किसी प्रकार का कोई दुख सताता था तो भी वह बंसी बजा देते थे भगवान श्री कृष्ण अपनी बंदी से बहुत प्रेम करते थे और उनकी बांसुरी का नाम महानंदा यह सम्मोहिनी था.

हिंदू धर्म में धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव ने स्वयं महर्षि दधीचि की हड्डियों से बांसुरी को बनाया था और जब वह भगवान श्री कृष्ण के जन्म के समय उनसे मिलने आए थे तो उन्हें मिलने के उपलक्ष में भेंट स्वरूप बांसुरी बैठ कर दी थी और यह बांसुरी भगवान श्री कृष्ण को काफी प्रिय दी थी इसलिए लोग उन्हें बंसी वाले नटखट गोपाल के नाम से बुलाते थे.

श्री कृष्ण का जन्म कंस वध के लिए ही हुआ था और जब उन्होंने कंस का वध कर दिया था तो रुक्मणी से शादी करने के बाद भी द्वारिका में रहने चले गए थे रुकमणी जी ने भी हमेशा अपनी पत्नी धर्म का फर्ज निभाया और भगवान की सेवा में ही अपना जीवन व्यतीत किया.

परंतु भगवान श्री कृष्ण के मन में हमेशा राधा ही बसती थी जिसे वह कभी भूल ही नहीं  पाय आज भी भगवान श्री कृष्ण के साथ उनकी प्रिय राधा ही पूजी जाती है.

धार्मिक मान्यताओं के आधार पर यदि बात करें तो श्रीकृष्ण ने अपने जीवन में हर रिश्ते को बहुत अच्छी तरीके से निभाया है परंतु जब जीवन का अंतिम समय आने वाला था तब उन्होंने राधा के साथ दोबारा अपना रिश्ता बनाया क्योंकि इस समय उन दोनों का मिलन दोबारा हो चुका था.

इसी समय श्री कृष्ण ने राधा से कहा कि तुम कुछ मांगो तब राधा ने कहा कि मैं आपकी बांसुरी की आवाज सुनना चाहती हूं बताया जाता है कि जैसे ही श्री कृष्ण बांसुरी बजाने लगे तो बांसुरी की धुन सुनते सुनते ही राधा रानी ने अपने शरीर को त्याग दिया था और जैसे ही राधा ने अपने प्राण त्यागे भगवान उनका योग से नहीं पाए और अपनी बांसुरी को तोड़ कर फेंक दिया.

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